

सक्ती – सक्ती जिले में एक ओर छत्तीसगढ़ राज्योत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर RKM पावर प्लांट से काम से हटाए गए स्थानीय ठेका मजदूर रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें काम से हटाकर दूसरे प्रदेशों के लोगों को काम पर प्राथमिकता दी जा रही है। महीनों बीत जाने के बाद भी न तो प्लांट प्रबंधन ने उनकी सुध ली और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल की गई है।
दरअसल, किसी भी उद्योग की स्थापना के दौरान स्थानीय युवाओं और छत्तीसगढ़िया लोगों को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन RKM पावर प्लांट से सामने आया यह मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। यहां लंबे समय से ठेका श्रमिक के रूप में काम कर रहे स्थानीय मजदूरों को काम से बाहर कर दिया गया है। रोजगार छिनने के बाद मजदूरों के सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक उन्हें दोबारा काम पर रखने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। मजदूरों का आरोप है कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय बाहरी प्रदेशों के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
ऐसे में राज्योत्सव के अवसर पर स्थानीय रोजगार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। एक तरफ छत्तीसगढ़िया अस्मिता और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की बात होती है, तो दूसरी तरफ जिले के ही मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
अब सवाल यह है कि RKM पावर प्लांट प्रबंधन स्थानीय मजदूरों की समस्याओं पर कब ध्यान देगा? क्या प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर मजदूरों को उनका रोजगार वापस दिलाने के लिए पहल करेगा? वहीं, प्लांट प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
