छत्तीसगढ़

Sakti – वेदांता बालको के प्रयासों से गांवों में बढ़ी आमदनी, खेती से आगे बढ़ा रोजगार का दायरा

सक्ती – छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में अब आजीविका का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। एकल फसल पर निर्भरता से निकलकर लोग अब आय के कई स्रोत अपना रहे हैं। इस बदलाव में वेदांता लिमिटेड की इकाई बालको की पहलें अहम भूमिका निभा रही हैं।

छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, जहां अधिकतर किसान बारिश आधारित खेती पर निर्भर हैं। सीमित सिंचाई और एक फसल पर निर्भरता के कारण आय अस्थिर रहती थी। लेकिन अब कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा के 123 गांवों में तस्वीर बदल रही है। वेदांता बालको के सामुदायिक कार्यक्रमों से 2 लाख से ज्यादा लोग लाभान्वित हो चुके हैं।

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जिनसे 6 हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। ये महिलाएं अब छोटे-छोटे व्यवसायों के जरिए आय अर्जित कर रही हैं। करीब 600 महिलाएं नियमित कमाई कर रही हैं, जबकि 2200 से ज्यादा महिलाएं विभिन्न आय सृजन गतिविधियों में शामिल हैं।

कोरबा जिले की विजय लक्ष्मी सारथी जैसी महिलाएं इसकी मिसाल हैं, जिन्होंने प्रशिक्षण के बाद अपना खुद का फूड बिजनेस शुरू कर हर महीने 12 से 15 हजार रुपये तक कमाना शुरू किया है।

वहीं युवाओं के लिए वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से रोजगार के नए रास्ते खुले हैं। अब तक 15 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से हर साल 1 हजार से ज्यादा युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी मिल रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया जा रहा है। कोचिंग सेंटरों के जरिए छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से संचालित ‘नंद घर’ केंद्रों के माध्यम से बच्चों और माताओं को शिक्षा और पोषण सुविधाएं मिल रही हैं।

स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में सुधार से ग्रामीण जीवन और भी आसान हुआ है, जिससे लोगों की कार्यक्षमता और आय दोनों में वृद्धि हुई है।

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