

सक्ती – अपने परिवार, समाज और देश के लिए कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाला हर युवा चाहता है कि वह जल्द से जल्द आत्मनिर्भर बने। हालांकि सरकार द्वारा तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के अनेक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन देश की विशाल युवा आबादी के मुकाबले उनकी पहुंच सीमित है। कई प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसे भी हैं जहां प्रशिक्षण तो मिलता है, लेकिन रोजगार के अवसर सुनिश्चित नहीं हो पाते। ऐसे समय में ऐसे संस्थानों की आवश्यकता बढ़ जाती है जो कौशल प्रशिक्षण के साथ रोजगार का मार्ग भी प्रशस्त करें।
इसी दिशा में वेदांता स्किल स्कूल युवाओं के लिए उम्मीद की नई राह बनकर उभरा है। वर्ष 2011 में बालको के सामुदायिक विकास कार्यक्रम के तहत स्थापित यह संस्थान औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण एवं रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। कोरबा, कबीरधाम और सरगुजा क्षेत्रों में संचालित वेदांता स्किल स्कूल अब तक 15 हजार से अधिक युवाओं को स्थिर एवं सम्मानजनक करियर की दिशा दे चुका है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 1200 से अधिक युवाओं ने विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें से 83 प्रतिशत युवाओं को देश के 12 राज्यों में विभिन्न कंपनियों में रोजगार मिला। इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की रही जिन्हें पहली बार औद्योगिक वातावरण में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ।
अविलाचना महंत की कहानी इस बदलाव का प्रेरणादायक उदाहरण है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली अविलाचना के पिता दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाते थे। रोजगार और सही मार्गदर्शन की तलाश में उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में प्रवेश लिया। ‘फिटर इलेक्ट्रिकल असेंबली’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने तकनीकी कौशल और औद्योगिक अनुशासन सीखा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में ऑपरेटर के रूप में नौकरी मिली, जहां उन्हें लगभग 18 हजार रुपए मासिक वेतन के साथ सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी प्राप्त हो रही हैं। आज वे अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी हैं और आगे की पढ़ाई के लिए बचत भी कर रही हैं।
इसी तरह निशा महंत ने भी कठिन परिस्थितियों के बीच वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से नई दिशा पाई। कम उम्र में मां को खोने और बीमार पिता की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। मित्र की सलाह पर उन्होंने फूड एंड बेवरेज सर्विस का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद नौकरी मिली, हालांकि पारिवारिक कारणों से उन्हें वापस लौटना पड़ा। बाद में उनके कौशल और अनुभव को देखते हुए घर के पास ही एक बड़े होटल में उन्हें रोजगार मिल गया। आज निशा न केवल परिवार का सहारा हैं बल्कि अपनी छोटी बहन की पढ़ाई का खर्च भी उठा रही हैं।
वेदांता स्किल स्कूल एक आवासीय प्रशिक्षण केंद्र है, जहां छात्रों को आर्थिक संसाधनों की चिंता किए बिना सीखने का अवसर मिलता है। यहां प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं और एनएसडीसी से प्रमाणित हैं। विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ अनुशासन, कार्य संस्कृति और आधुनिक औद्योगिक व्यवहार की भी जानकारी दी जाती है। साथ ही देशभर के नियोजकों के नेटवर्क से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
स्कूल के मेंटर रघुराज सिंह (आईबी लॉजिस्टिक्स) के अनुसार, युवाओं को मार्गदर्शन देना उनके लिए बेहद संतोषजनक अनुभव है। उनका कहना है कि युवाओं में सीखने और आगे बढ़ने का जो उत्साह दिखाई देता है, वह प्रेरणादायक है।
वेदांता स्किल स्कूल की खास बात यह भी है कि इसके प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल 61 प्रतिशत महिलाएं और 59 प्रतिशत युवा वंचित समुदायों से आते हैं। यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार देती है बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, सम्मान और बेहतर भविष्य की दिशा भी प्रदान करती है।
आज वेदांता स्किल स्कूल से प्रशिक्षित युवा अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं, भाई-बहनों की पढ़ाई में सहयोग दे रहे हैं और समाज में सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए संस्थान को ‘आईसीसी सोशल इम्पैक्ट अवार्ड 2026’ सहित कई राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।
वेदांता स्किल स्कूल की यह यात्रा केवल कौशल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं की कहानी है जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अवसरों का सही उपयोग कर आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई पहचान बनाई है।

